Vegetarian Crocodile( शाकाहारी मगरमछ)
बेमेतरा गाँव का मगरमच्छ गंगाराम
Gangaram crocodile
शाकाहारी मगरमछ शायद ही कही देखने को मिलता है हालाँकि चार साल पहले की घटना है एक छतीसगढ़ के इलाक़े में ऐसा घटना हुआ जो आपको आश्चर्य कर देगा उस मगरमछ का नाम था गंगा राम भाई कोई कैसे बिस्वास करेगा की शाकाहारी मगरमछ होते है लोगो को मगरमछ को देखने से ही डर लगने लगता है लेकिन यह बात सत्य है की छतीसगढ़ राज्य की घटना है मै तो बिस्वास नहीं करता लेकिन ऐसा हुआ की बिस्वास करना पड़ा छत्तीसगढ़ राज्य में एक गांव है जिसका नाम बाबा मोहतरा यह उसी गाओं की घटना है उस गांव में एक बड़ा तालाब है उसी तालाब में एक मगरमछ रहता था एक दिन गाँव के बुज़ुर्ग रामलाल अपने खेत से लौटते समय तालाब किनारे बैठकर दाल-चावल खाने लगे। तभी गंगाराम धीरे-धीरे पानी से बाहर आया और कुछ दूरी पर बैठ गया। रामलाल पहले तो घबरा गए, लेकिन उन्होंने देखा कि गंगाराम बिल्कुल शांत था। उन्होंने थोड़े से दाल-चावल एक पत्ते पर रखकर उसकी ओर सरका दिए। गंगाराम ने आराम से उन्हें खाया और फिर बिना किसी को नुकसान पहुँचाए वापस तालाब में चला गया।
असली वफादारी इसे सीखो
अगले दिन भी गंगाराम उसी समय तालाब के किनारे आया। इस बार गाँव के कुछ और लोग भी उसे देखने पहुँचे। उन्होंने भी उसके लिए थोड़ा-सा दाल-चावल रखा। गंगाराम ने बड़े आराम से खाना खाया और फिर पानी में लौट गया। धीरे-धीरे यह रोज़ की बात बन गई। लोग कहते थे कि गंगाराम को दाल-चावल बहुत पसंद हैं।
कुछ ही समय में गंगाराम पूरे गाँव की पहचान बन गया। बच्चे दूर से उसे देखकर खुश होते और हाथ हिलाकर उसका स्वागत करते। महिलाएँ तालाब पर पानी भरने आतीं तो गंगाराम शांत होकर पानी में तैरता रहता। किसान खेतों से लौटते समय उसे देखकर मुस्कुरा देते। आसपास के गाँवों से भी लोग इस अनोखे मगरमच्छ को देखने आने लगे।गाँव के सरपंच ने सभी लोगों को समझाया कि गंगाराम भले ही शांत दिखाई देता हो, लेकिन वह एक जंगली जीव है। इसलिए किसी को भी उसके बहुत पास नहीं जाना चाहिए और न ही उसे छूने की कोशिश करनी चाहिए। गाँव वालों ने इस सलाह का पालन किया और हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखी।
इंसान मगरमछ की अनोखी दोस्ती
बरसात के दिनों में एक बार तालाब का पानी बहुत बढ़ गया। सभी लोगों को चिंता थी कि कहीं गंगाराम बह न जाए। लेकिन कुछ दिनों बाद जब पानी कम हुआ, तो गंगाराम फिर उसी तालाब में दिखाई दिया। उसे सुरक्षित देखकर पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। बच्चों ने तालियाँ बजाईं और लोगों ने उसकी सलामती की खुशी मनाई।समय के साथ गंगाराम और गाँव वालों की यह अनोखी पहचान पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। लोग दूर-दूर से उसे देखने आते और गाँव की सुंदरता की भी प्रशंसा करते। गाँव के बुज़ुर्ग बच्चों को यह कहानी सुनाते और बताते कि प्रकृति के हर जीव का सम्मान करना चाहिए।
और वह कई पीढ़ियों से रहता था और वह गाओं वालो के लिए बड़ा वफादार था जब वह पानी से बहार निकलता था तो लोग चिलाते कहते थे ये गंगाराम को भूक लगी है इसे दाल चावल खिलाव गंगाराम आ गया है दाल चावल खाने के बाद वह नहीं भागता था तो लोग उसे उठाकर तालाब में छोड़ आते थे ये उसकी सचाई है सबसे कमाल की बात थी की उसी तालाब में सभी लोग नहाते थे महिलाये पानी भरते थी , जानवर पानी पिता था ,लेकिन किसी को कुछ नुकसान नहीं पहुँचता था साल 2019 में ये गंगाराम चल बसा लोग उसके लिए रो पड़े सरे लोगो को इमोशनल कर के चला गया भाई ये तो
मैं पहली बार उस गाओं की हकीकत को सुना
हमें जीवो पर दया करनी चाहिए
हमें सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए। साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि मगरमच्छ एक जंगली जानवर है। इसलिए वास्तविक जीवन में उससे हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखना, वन विभाग के नियमों का पालन करना और किसी भी जंगली जीव को अपने हाथ से भोजन न खिलाना चाहिए। प्रकृति के साथ संतुलन और सावधानी ही इंसान और वन्यजीवों के सुरक्षित सह-अस्तित्व का सबसे

